शरीर टूट जाने का अर्थ सब खत्म होना नहीं है
स्पीकर- जेनिन शेफर्ड
प्रोफाइल : एक्सीडेंट के बाद न सिर्फ चलने लगीं, बल्कि उड़ना भी सीखा।
TED पर अब तक 1,97,963 लोग सुन चुके हैं।
मैं ऑस्ट्रेलियाई स्की टीम की सदस्य थी। मुझे विंटर ओलिंपिक में शामिल
होना था। मैं अपनी टीम के सदस्यों के साथ ट्रेनिंग बाइक चलाते हुए पहाड़ों
की ओर जा रही थी। वहां पहुंचने में साढ़े पांच घंटे लगने थे। करीब दस मिनट
साइकिल चलाने के बाद आंखों के सामने अंधेरा छा गया। मेरे बदन में दर्द
होने लगा। मुझे क्या हुआ था?
एक तेज रफ्तार ट्रक ने मुझे टक्कर मार दी थी। मुझे गंभीर चोटें लगी
थीं। मेरी गर्दन टूट गई थी और रीढ़ की हड्डी छह जगह से टूट गई थी। बाईं
पसलियां, दायां हाथ, कॉलर बोन, पैरों की कुछ हड्डियां टूट गई थीं। सिर आगे
से फट गया था और करीब 5.5 लीटर खून बह गया था। मुझे सिडनी के बड़े स्पाइनल
यूनिट में भर्ती कराया गया। करीब 10 दिन बाद मुझे होश आया। कमर से नीचे तक
का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। डॉक्टरों ने बताया कि यह 10 से 20 फीसदी
तक ही रिकवर हो पाएगा।
मैंने सोचा मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ? फिर मुझे स्पाइनल वार्ड की एक
साथी मारिया का ख्याल आया। उसे कार एक्सीडेंट में बुरी चोट लगी थी और उसे
16 वें जन्मदिन के दिन होश आया। उसके गर्दन से नीचे का हिस्सा हिल नहीं
सकता था और वह बोल भी नहीं सकती थी। फिर भी वह हमेशा मुस्कुराती रहती। उसने
कभी कोई शिकायत नहीं की।
मैंने जिंदगी के बारे में फिर से सोचा कि मैं क्यों नहीं। एथलीट होने
के नाते मेरा शरीर एक मशीन बन गया था। पर अब मैं रचनात्मक कामों के बारे
में सोच रही थी। मुझे नहीं पता था कि आगे क्या करना है। तभी मेरे ऊपर से
हवाई जहाज गुजरा। मैंने सोचा कि मुझे उड़ना है। फिर मैंने फ्लाइंग स्कूल
में पायलट का लाइसेंस लेने के लिए फोन किया। मैं उनके लिए सही कैंडिडेट
नहीं थी, क्योंकि मैं चल भी नहीं सकती थी। फिर भी वहां एंड्रूय नाम के
फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर ने मुझे फ्लाइंग सिखाने का फैसला किया। ये आसान नहीं
था।
मैं फ्लाइंग क्लास लेती रही व घर में भी धीरे-धीरे चलना शुरू किया।
एक्सीडेंट के बाद 18 महीनों में ही मैंने प्राइवेट पायलट लाइसेंस, ट्विन
इंजन रेटिंग, खराब मौसम में उड़ान भरने की ट्रेनिंग, कमर्शियल पायलेट
लाइसेंस हासिल किया। उसी स्कूल में दूसरों को फ्लाइंग सिखाने लगी। मैं एक
कदम और आगे बढ़कर एयरोबेटिक्स फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बन गई। इसलिए मैं कहना
चाहती हूं कि शारीरिक क्षमता सीमित हो सकती है, लेकिन अंतरशक्ति को नहीं
रोका जा सकता। अपनी ताकत को पहचानें।
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