Wednesday, 17 October 2012


बेस्ट स्पीच: बड़ों को भी बच्चों से सीखने की है जरूरत

अडोरा स्वितक | Oct 17, 2012, 00:02AM IST
 
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स्पीकर- अडोरा स्वितक
प्रोफाइल : सात साल की उम्र से ब्लॉग लिख रहीं 14 वर्षीय अडोरा बेहतर दुनिया के लिए बड़ों से 'बचकानी' सोच अपनाने की अपेक्षा रखती हैं।

TED पर इसे अब तक 21,36,622 लाख लोग सुन चुके हैं।
मैं एक प्रश्न से शुरुआत करना चाहती हूं। आपको पिछली बार कब 'बचकानी हरकत' के लिए कुछ कहा गया था? बच्चों के लिए तो यह आम बात है। हम कई अवसरों पर जो मन में आता है, कर गुजरते हैं। हम अपने किए पर खुश रहते हैं। मेरा मानना है कि आज दुनिया को कुछ अलग तरह की 'नासमझ सोच' की जरूरत है। एक ऐसी सोच जो महत्वाकांक्षी हो, प्रेरणादायी हो और आशा से भरी हो।

मेरी इच्छा है कि दुनिया में कोई भूखा न रहे या फिर सारी जरूरी चीजें मुफ्त में मिलें। हैं तो ये ख्याली पुलाव, लेकिन आपमें से कितने लोग अभी भी ऐसे सपने देखते हैं और उनकी संभावनाओं में विश्वास करते हैं? आप हानि-लाभ के तराजू में चीजें तौलते हैं, लेकिन हम बच्चे अभी भी पूर्णता की कल्पना करते हैं। मेरी नजर में यह अच्छा है, क्योंकि किसी चीज को सच करने के लिए पहले आपको उसकी कल्पना करनी पड़ती है।

मुझे लगता है कि बड़ों को बच्चों से सीखना शुरू कर देना चाहिए। क्लास में सिर्फ एक शिक्षक नहीं होना चाहिए, जो छात्रों को बताता रहे कि ऐसे करो, वैसे करो। इसके उलट छात्रों को भी अपने शिक्षक को पढ़ाना चाहिए। बड़ों और बच्चों के बीच ज्ञान का लेन-देन दो-तरफा होना चाहिए। दुर्भाग्य से सच्चाई अलग है और इसका संबंध विश्वास या उसकी कमी से है। अगर आप किसी पर विश्वास नहीं करते, तो प्रतिबंध लगाते हैं, है ना?

यही नहीं, बड़े अक्सर बच्चों की योग्यता को कम महत्व देते हैं। मुझे चार साल की उम्र से लिखना पसंद था। जब मैं 6 साल की थी तब मां ने मुझे लैपटॉप लाकर दिया। मैंने तीन सौ से ऊपर छोटी कहानियां लिखीं। मैं उन्हें छपवाना चाहती थी। इसके लिए मुझे 'बड़ी हो जाओ' कहने के बजाय मां-बाप ने पूरा सहयोग दिया। हालांकि कई प्रकाशकों का रवैया सहयोगी नहीं था। बच्चों के एक बड़े प्रकाशक ने कहा कि वे बच्चों के साथ काम नहीं करते हैं। है न अजीब? बच्चों के प्रकाशक बच्चों के साथ काम नहीं करते? एक प्रकाशक ने भरोसा किया और मैं आज इस मुकाम पर आ पहुंची कि लोग मुझे सुनते हैं।

आपको हम पर भरोसा करना चाहिए। आज हमारी बात सुनिए, क्योंकि हम आने वाला कल हैं। दुनिया को नए अवसरों की जरूरत है। नए नेताओं और नए ख्यालों के लिए। बच्चों को नेतृत्व और कामयाबी के नए मौकों की जरूरत है। क्या आप यह देने को तैयार हैं? 

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