Tuesday, 16 October 2012


बेस्ट स्पीचः क्यों कुछ ही लोग हो पाते हैं सफल


 

स्पीकर- साइमन सिनेक

प्रोफाइल : लेखक मोटिवेशनल स्पीकर हैं। मिलिट्री और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं।

क्यों पढ़ें: विभिन्न वेबसाइट्स पर अब तक 80 लाख लोग सुन चुके हैं।


क्यों, दुनिया में कुछ लोग सफल हो पाते हैं। सारी मुसीबतों के बाद, सुविधाओं के बिना भी जिंदगी में आगे बढ़ पाते हैं। मैंने इसका हल ढूंढ निकाला। इसे नाम दिया है गोल्डन सर्कल। ये बताता है कि कैसे कुछ लीडर लोगों के आदर्श बन जाते हैं। 100 फीसदी लोग यह जानते हैं कि उन्होंने क्या खास किया।


कुछ ही इस बात को जान पाते हैं कि उन्होंने ये कैसे किया। लेकिन उससे भी कम लोग ये जानते हैं उन्होंने ऐसा क्यों किया। यह ‘व्हॉय’ ही है जो बताता है कि हम क्यों कोई काम करते हैं। रोजमर्रा के कामों से लेकर हमारे सपनों तक। जरूरी है कि हमें हमारा ‘व्हाय’ पता हो।


इसे एक उदाहरण से समझिए। हार्वर्ड से पढ़े लैंग्ले को वॉर डिपार्टमेंट ने फ्लाइंग मशीन पर काम करने के लिए 50 हजार डॉलर दिए गए। उसने इस काम के लिए बुद्धिजीवियों की फौज खड़ी कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उसके काम को खासी जगह दी। वहीं सौ मील की दूरी पर ओहियो में विल्बर और ऑरविल राइट थे। वे भी फ्लाइंग मशीन बना रहे थे। उनके पास न तालीम थी, न पैसा। लेकिन उनके पास वह था,जो लैंग्ले के पास नहीं था। उन्हें सिर्फ ये पता था कि अगर उन्होंने उड़ने वाली मशीन बना ली तो इससे दुनिया बदल जाएगी।


ये था उनका ‘व्हाय’। 17 दिसंबर 1903 को राइट ब्रदर्स ने उड़ान भरी। जब लैंग्ले को ये पता चला तो उसने हार मान ली। इस दिशा में काम करना बंद कर दिया। राइट ब्रदर्स सफल हुए। लेकिन लैंग्ले को आज कोई नहीं पहचानता।
एक और उदाहरण बताता हूं। 1963 की गर्मियों में करीब ढाई लाख लोग डॉ मार्टिन लूथर किंग को सुनने जमा हुए। वह भी बिना निमंत्रण। यह सूचना कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने लोगों से सिर्फ वह कहा जिस पर उन्हें खुद विश्वास था। किंग ने वह स्पीच खुद का सपना है, बताकर दी थी। न कि उनकी कोई योजना। उनके विश्वास पर लोगों ने भी विश्वास किया। वहां कोई सिर्फ किंग के लिए नहीं आया था। बल्कि यही सोच बाकी लोग भी अमेरिका के लिए रखते थे। शायद यही कारण था कि लोग वाशिंगटन के बस स्टैंड पर 8 घंटे तक धूप में खड़े रहे। संस्थान में भी हम उन्हीं से प्रेरित होते हैं, जो हमें लीड करते हैं। हम पर दबाव होता। हम खुद ऐसा करना चाहते हैं।

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