Tuesday, 16 October 2012

एक कॉलेज गांधीजी के तौर-तरीकों वाला



स्पीकर - बंकर राय, प्रोफाइल : बेयरफुट कॉलेज के संस्थापक। कॉलेज में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का समाधान ग्रामीणों द्वारा करना सिखाया जाता है। 

क्यों पढ़ें : TED पर इसे 39,58,339 लोग सुन चुके हैं।

मैं बेहद प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ा हूं। इसके बलबूते मैं चाहता तो डिप्लोमेट, शिक्षक या डॉक्टर बनता, लेकिन मैं गांव को समझना चाहता था। 1965 में बिहार में जबर्दस्त अकाल पड़ा। मैं वहां गया और उस अनुभव ने मेरा जीवन बदल दिया। मैं वापस आया और अपनी मां से बोला कि मैं एक गांव में रहकर काम करना चाहता हूं। यह सुनने के बाद उन्होंने लंबे समय तक मुझसे बात नहीं की, क्योंकि उन्हें लगता था कि मैंने अपने खानदान की नाक कटवा दी है। गांव की ओर रुख करने से पहले मैंने ‘बेयरफुट कॉलेज’ शुरू करने की ठान ली थी यानी एक कॉलेज, जो सिर्फ गरीबों के लिए होगा।

राजस्थान के तिलोनिया गांव में पहला दिन था। मेरा उद्देश्य जानने के बाद गांव के बड़े-बूढ़ों ने मुझे एक सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘कृपा करके, किसी डिग्री-होल्डर को अपने कॉलेज में मत लाना।’ यह परिपाटी आज भी कायम है। इसके तहत हमारे कॉलेज में आने के लिए आपके पास ऐसा हुनर होना चाहिए, जिससे लोगों का भला हो सकता हो। जो समाज को कोई सेवा प्रदान कर सके। हमारे कॉलेज में महात्मा गांधी की जीवन-शैली और काम के तरीके का पालन होता है।

कॉलेज में हम सर्टिफिकेट नहीं देते, बल्कि जिस समाज की आप सेवा करते हैं, वह आपको मान्यता देता है। यह अकेला ऐसा कॉलेज है, जो पूर्णत: सौर-ऊर्जा पर चलता है। जब तक सूरज है, हमें बिजली की समस्या नहीं होने वाली। हमारे यहां एक दादी मां दंत-चिकित्सक हैं। करीब 7000 बच्चों के दांतों की देखभाल उनके जिम्मे है। हम बारिश के पानी को एकत्र करते हैं। सारी छतों को जमीन के नीचे बने 4,00,000 लीटर के टैंक से जोड़ा गया है। यदि हमें चार साल लगातार सूखे का सामना करना पड़े, तो भी हमारे पास पानी होगा।

तिलोनिया के नाइट स्कूलों में 75,000 से ज्यादा बच्चे पढ़ चुके हैं। हमारे कॉलेज की औरतें विदेश गईं और वहां कॉलेज से मिली शिक्षा के आधार पर सफलता का झंडा फहराया। हमने लगभग उन सभी समस्याओं का हल खोजा, जिसके लिए पूरी दुनिया विशेषज्ञों की मदद लेती है। यह सब किया हमारे बेयरफुट कॉलेज ने। मैं अंत में महात्मा गांधी की बात दोहराना चाहूंगा- ‘किसी काम की शुरुआत में पहले लोग आपको अनसुना करते हैं। फिर हंसते हैं। फिर वे आपसे लड़ते हैं और अंतत: आप जीत जाते हैं।’

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