Wednesday, 24 October 2012

बेस्ट स्पीच: मौत के डर ने बदल दिया जिंदगी का नजरिया


 


स्पीकर- रिक इलियास
प्रोफाइल : रेड वेंचर कंपनी के सीईओ जनवरी 2009 में हडसन नदी में इमरजेंसी लैंडिंग करने वाली फ्लाइट 1549 की अगली कतार में बैठे थे।
TED पर इसे अब तक 28,92,874 लाख लोग सुन चुके हैं।

आप जमीन से तीन हजार फीट की ऊंचाई पर हों। एक धमाका और विमान के भीतर धुआं ही धुआं। मैंने एक क्रैश होते जहाज को देखा है। बाहर से नहीं उसमें बैठे हुए। पायलट के 'ब्रेस फॉर इंपैक्ट' शब्द आज भी कानों में गूंजते हैं। सभी की आंखों में आतंक साफ झलक रहा था। जीवन का अंत हो रहा था, लेकिन वही अंत मेरे लिए एक नई सुबह लेकर आया। मैंने मंडराती मौत से कई सबक सीखे, जिन्हें आप संग बांटता हूं।

पहला सबक। मैंने सीखा कि सब कुछ एक पल में बदल जाता है। उससे पहले तक मैं किसी से मिलने के बारे में सोचता था या किसी काम को करने की सोचता था, तो उसे अगले दिन या आगे के लिए टाल देता था। वह सारी बातें मेरी आंखों के आगे घूम रही थीं और मैं यही सोच रहा था कि अगर बच गया तो फलां काम सबसे पहले करूंगा। अब मैं जीवन में कुछ भी बाद के लिए नहीं टालना चाहता हूं।
दूसरा सबक। हमारा विमान जॉर्ज वाशिंगटन पुल के ऊपर था। मैं सोच रहा था कि मैंने एक बहुत अच्छा जीवन जीया है। अपनी गलतियों के बीच भी मंैने हर काम को बेहतर करने की कोशिश की है। लेकिन मैंने अपनी गलतियों को भी बीच में आने दिया है। मुझे इन सब बातों का पछतावा हो रहा था। उस सब समय के लिए जो मैंने झूठे अहं या अपने घमंड में बर्बाद किया। इस फेर में मैंने उन लोगों के साथ नाखुशी बरती, जो मेरे अपने थे। मैंने अपनी पत्नी, दोस्तों और अन्य लोगों के साथ रिश्तों के बारे में सोचा। मन में सिर्फ और सिर्फ अफसोस था। बच निकलते ही सबसे पहले अपने जीवन से नकारात्मकता को निकाल फेंका। मेरा जीवन बिल्कुल आदर्श तो नहीं हुआ, लेकिन बेहतर जरूर है। अब मैं हमेशा सही साबित होना नहीं चाहता, सिर्फ खुश रहना चाहता हूं।
तीसरा सबक। विमान नीचे आ रहा था और मेरे दिमाग में उलटी गिनती चलने लगी थी। मैं चाहता था कि सब कुछ एक धमाके में खत्म हो जाए। मरने का डर खत्म हो चुका था और उसकी जगह दुख ले ली थी। मैं अपने बेटे की याद में रो रहा था। मैं उसे बड़ा होते देखना चाहता था, जो उस वक्त नामुमकिन लग रहा था। आज भी उन पलों को भूला नहीं हूं। अब मेरे जीवन का एक ही उद्देश्य है कि मैं एक अच्छा पिता बन सकूं।
भगवान न करे किसी और के साथ ऐसा हो। लेकिन मौत के सामने मेरे सीखे इन सबकों से आप अपने लिए भी सबक ले सकते हैं।
 

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