Tuesday, 16 October 2012


स्पीकर- जैनेट एकेल्मैन
प्रोफाइल : अमेरिकी आर्टिस्ट प्रकृति से प्रेरित शिल्प बनाती हैं। उनकी कलाकृतियां हवा, पानी और प्रकाश के सामंजस्य में आकर्षण बिखेरती हैं।
TED पर इसे अब तक 7,36,472 लाख लोग सुन चुके हैं।
मैं कल्पना को पूरी गंभीरता से लेने की पक्षधर हूं और यहीं से बात शुरू करती हूं। 14 साल पहले मछली पकडऩे के जाल से मेरी रोमांचक मुलाकात हुई। यह वर्षों से एक ही काम में उपयोग में लाया जा रहा है। लेकिन मैं आज इसका इस्तेमाल दुनिया भर के शहरों में कला के नमूनों को बनाने में कर रही हूं। मैंने चित्रकला या शिल्पकला की कोई पढ़ाई नहीं की, लेकिन मेरी कल्पनाओं में शिल्प हमेशा होते थे।

दस वर्षों तक चित्रकारी करने के बाद मुझे फुलब्राइट स्कॉलरशिप के जरिए भारत आने का मौका मिला। मैं महाबलीपुरम पहुंच गईं, लेकिन मेरे रंग नहीं पहुंच पाए थे। प्रदर्शनी की आखिरी तारीख सिर पर थी और मुझे कुछ न कुछ करना ही था। मैं इसी सोच-विचार में समुद्र के किनारे टहल रही थीं कि मैंने मछुआरों को रेत पर मछली पकडऩे वाले जाल को गट्ठर का रूप देते देखा। इसने मुझे एक नया आइडिया दिया। जाल से मेरा परिचय तो पहले हो चुका था, लेकिन अब एक नई कल्पना सिर उठा रही थी। भारी और ठोस सामग्री के बगैर शिल्प बनाने का विचार। इस तरह बनी मेरी पहली कृति का नाम 'वाइड हिप्स' था।


उसके बाद कुछ दिनों के लिए मैं लिथुआनिया गई। वहां फीते बनाने वालों के साथ और बारीकियां सीखीं। इनकी मदद से मैंने मैड्रिड शहर के लिए शिल्प बनाया। इसके लिए मैं कुछ ऐसा मटेरियल चाहती थी, जो सूरज की पराबैंगनी किरणों, हवा और प्रदूषण से बच सके। साथ ही मुलायम भी रहे ताकि बहती हवा के साथ आकार पल-पल बदल सके। यह मेरी कल्पना थी, जिसे कई लोग सिरे से खारिज कर चुके थे। मैंने हार नहीं मानी और स्टील का हल्का शिल्प बनाने में सफल रहीं।

इस बीच मुझे फिलाडेल्फिया सिटी हॉल को संवारने का अवसर मिला। इसके लिए हमने पानी की छोटी बूंदों को सूखी धुंध में बदलने की कल्पना की। विज्ञान के नियमों का पालन कर इस चुनौती पर भी खरी उतरी। अगली चुनौती अमेरिका के डेनवर शहर से मिली। वहां मैंने पश्चिमी गोलाद्र्ध के 35 देशों और उनके आपसी संबंधों को दिखाती एक कलाकृति बनाई।
मैं अब तक के अपने सफर के बारे में सिर्फ इतना ही कहूंगी कि कल्पना न होती, तो मैं भी नहीं होती। 14 साल पहले मैंने सुंदरता की तलाश परंपरागत चीजों में की थी। उस वक्त यह मेरी कल्पना थी, लेकिन मैंने उसे गंभीरता से लिया। इसका नतीजा आज सामने है।

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