Tuesday, 16 October 2012

समझ के लिए औरों को भी ध्यान से सुनें


 

प्रोफाइल : ये साउंड स्पेशलिस्ट हैं और इसके बेहतर इस्तेमाल पर बिजनेस सॉल्युशंस सुझाते हैं।


क्यों पढ़ें : इसे TED पर अब तक 14,27,935 लोग सुन चुके हैं।


हम अपने सुनने की क्षमता खो रहे हैं। हम जितना सुनते हैं, उसका केवल 25 फीसदी हिस्सा ही पास रख पाते हैं। यह गंभीर समस्या है, क्योंकि सुनना कुछ समझने का तरीका है। कल्पना करें एक ऐसी दुनिया की, जहां हम एक-दूसरे को नहीं सुन सकें। हम सभी सिहर जाएंगे। ऐसे में आपको बताता हूं पांच प्रयोगों के बारे में, जो सुनने की क्षमता बढ़ाते हैं। पहला, एक दिन में सिर्फ तीन मिनट की खामोशी एक अद्भुत प्रयोग है। इस तरह हम कानों को फिर से क्रियाशील और अनुकूल बनाते हैं। अगर खामोशी नहीं मिल पाए, तो शांत रहें। यह भी अच्छा तरीका रहेगा।





दूसरा, मैं इसे मिक्सर कहता हूं। कॉफी शॉप या किसी बार में आवाज के कितने स्रोत होते हैं? उनमें से कितनों को हम सुन सकते हैं? वहां आवाजों का मिश्रण होता है। उसमें अलग-अलग आवाज और उसके स्रोत को पहचानना सुनने की क्षमता बढ़ाने का अच्छा तरीका है। तीसरे प्रयोग को मैं स्वाद लेना कहता हूं। यह नीरस आवाजों का आनंद लेने के बारे में है। मसलन मेरा कॉफी ग्राइंडर या टंबल ड्रायर। नीरस आवाजें सुनना भी रोमांचक हो सकता है। मैं इसे छिपा हुआ गीत कहता हूं, जो हमारे आसपास हर समय रहता है।





अगला प्रयोग शायद इन सबमें महत्वपूर्ण है। आप अपने सुनने की अवस्था को बदलते रहिए। स्थान और अवस्था बदलने के साथ-साथ सुनने की योग्यता या कहें कि क्षमता भी बदलती रहती है। सुनने के तारतम्य में आने वाला बदलाव हमें आवाज के स्रोत की तरफ ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। अंत में एक संक्षित शब्द का इस्तेमाल करें। मैं इसे रस कहता हूं। इसका मतलब है कि बोलने वाले पर ध्यान दें। उसकी सराहना करें। उसे सुनते हुए हम्म, ओह, ओके जैसी हल्की आवाजें निकालें। परस्पर वार्तालाप में यह बेहद जरूरी है, जिससे संवाद में संबंध बनता है।




हर व्यक्ति को पूरी तन्मयता

और ध्यान से सुनना चाहिए। ऐसे ही हम पूरी तरह से अपनी जिंदगी को जी सकेंगे। एक-दूसरे को समझने में ऐसे ही हम सफल हो सकेंगे। इसलिए हमें स्कूलों में बच्चों को सुनना सिखाने की जरूरत है। अगर हम स्कूलों में सुनना सिखा सकें, तो हम उन्हें फिसलन भरे ढाल पर संभाल सकते हैं। इस तरह हम एक परस्पर समझ वाली और शांत दुनिया की रचना कर सकेंगे। इसके लिए दूसरों को ध्यान से सुनना जरूरी है।

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