इंस्पिरेशन से बनी ब्लड टेस्टिंग मशीन
मिश्किन इंगवाले | Oct 01, 2012, 04:57AM IST
प्रोफाइल : बायोसाइंस टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक हैं। इनकी कंपनी ने एनीमिया की जांच के लिए एक डिवाइस बनाया है, जिसमें बगैर नमूना लिए ब्लड टेस्ट कर सकते हैं।
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सन् 2009 में मैं अपनी पीएचडी पूरी करने में व्यस्त था। इसके साथ ही मैं ‘कोपनहेगन व्हील’ बना रहा था। यह एक इलेक्ट्रिक साइकिल है, जो मिट की सेंसेबल सिटी लैब में बन रही थी। उन्हीं दिनों मैं छुट्टियों में मुंबई अपने घर आया।
मुंबई प्रवास के दौरान एक दिन मैं अपने डॉक्टर दोस्त अभिषेक सेन से मिलने गया। उसका क्लीनिक शहर से लगभग दो घंटे के सफर पर था। वह किसी महिला की डिलीवरी कराने में व्यस्त था। इस कारण मुझे काफी इंतजार करना पड़ा। खैर, जब वह आया, तो उसका चेहरा उतरा हुआ था। मेरे पूछने पर उसने बताया कि मां को एनीमिया था और अधिक खून बह जाने के कारण वह मां और बच्चे को बचाने में विफल रहा।
मैं इंजीनियर हूं। फिर भी मुझे पता है कि एनीमिया इतना घातक नहीं होता कि जानलेवा साबित हो। बाजार में सस्ती दर पर इसकी तमाम दवाएं मौजूद हैं। मैं इसी उधेड़बुन में वहां से लौट आया। मैंने अपनी मां जो चाइल्ड स्पेशलिस्ट भी हैं, उनसे इस पर चर्चा की। उन्होंने मुझे इस बीमारी और जांच के बारे में पूरी जानकारी दी। मरीज के खून के नमूने को लेकर उसे कोलटर काउंटर मशीन से ही जांचा जाता है। यह थोड़ी महंगी मशीन है, जो सिर्फ बड़े शहरों में ही उपलब्ध है। अभिषेक के पास भी ऐसी मशीन नहीं है। इस बात ने मुझे प्रेरित किया कि मैं एक ऐसी मशीन बनाऊं, जो बगैर नमूना लिए यानी बगैर सुई चुभोए ब्लड टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा कर सके।
इसके बाद मैं, मेरा एक इंजीनियर मित्र और अभिषेक समेत तीन अन्य डॉक्टर इस मुहिम में शामिल हुए। भारत के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में प्रसूति का काम ‘आशा’ नर्स देखती हैं। मैं चाहता था कि हम ऐसी मशीन बनाएं, जिसे वह नर्स भी ऑपरेट कर सके।
ब्लड टेस्ट करने में ज्यादा झंझट न हो। हमने प्रयास शुरू किए। पहली बार लगा कि हम सफल हो गए, लेकिन नतीजा गलत था। इस तरह 32 प्रयासों के बाद हम ञ्जoह्वष्॥क्च मशीन बनाने में सफल रहे। यह मशीन हीमोग्लोबिन, ऑक्सीजन और हृदय गति नापती है। इसे उंगली पर रखें, चालू करें और लगभग 20 सेंकड में यह बगैर खून निकाले सारी जांच कर देती है। जांच के परिणाम एक छोटी स्क्रीन पर उभर आते हैं। इस मशीन की कार्यप्रणाली सरल है।
यह मशीन फोटोप्लेथिस्मोग्राफी सिद्धांत पर काम करती है। इसमें तीन अलग-अलग वेवलेंथ पर प्रकाश कोशिकाओं पर फेंका जाता है। कोशिकाएं कितना प्रकाश जज्ब करती हैं और कितना पार जाने देती हैं, इसके आधार पर मरीज के खून में हीमोग्लोबिन, ऑक्सीजन और अन्य बातों का पता लगाते हैं।
इसके जरिए दर्ज किए जाने वाले आंकड़ों को मोबाइल से बड़े शहरों में या विशेषज्ञ डॉक्टरों को बताकर उनकी राय ली जा सकती है। मैं चाहता हूं कि 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन जब एनीमिया के कारण खत्म हो रही जिंदगियों के आंकड़े तैयार करे तो वह न्यूनतम रहे।
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